(राग केदारौ)
सब तजि भजिऐ नंद कुमार ।
और भजे तैं काम सरै नहिं, मिटै न भव-जंजार ॥ [1]
जिहिं जिहिं जोनि जन्म धारयौ, बहु जोरयौ अघ को भार ।
तिहिं काटन कौं समरथ हरि कौ, तीछन नाम-कुठार ॥ [2]
वेद, पुरान, भागवत, गीता, सब कौ यह मत सार ।
भव-समुद्र हरि-पद-नौका बिनु, कोउ न उतारै पार ॥ [3]
यह जिय जानि, इहीं छिन भजि, दिन बीते जात असार ।
सूर पाइ यह समौ लाहु लहि, दुर्लभ फिरि संसार ॥ [4]
- श्री सूरदास, सूरसागर
सब सांसारिक प्रपंचों को त्याग कर श्री हरि का भजन करो । किसी अन्य का भजन करने से काम नहीं चलेगा, और न ही यह भव जंजाल मिटेगा । [1]
जिस जिस योनि में भी जीव जन्म लेता है उस उस योनि में पाप का भार चढ़ता रहता है । इन पापों को काटने का समर्थ हथियार केवल श्री हरि का नाम है । [2]
वेद, पुराण, भागवत, गीता आदि सब का यही सार है कि भव समुद्र से पार होने के लिया केवल श्री हरि के चरण रूपी नौका का ही सहारा है । [3]
इस तत्वज्ञान को ह्रदय से जान कर, इसी क्षण से श्री हरि का भजन आरंभ कर देना चाहिए क्योंकि यह अवसर बीता जा रहा है । श्री सूरदास जी कहते हैं कि ऐसी दुर्लभ मानव देह को प्राप्त करके भी यदि भगवद्प्राप्ति नहीं की, तो फिर पुन: ऐसा अवसर कब मिलेगा? [4]
सब तजि भजिऐ नंद कुमार ।
और भजे तैं काम सरै नहिं, मिटै न भव-जंजार ॥ [1]
जिहिं जिहिं जोनि जन्म धारयौ, बहु जोरयौ अघ को भार ।
तिहिं काटन कौं समरथ हरि कौ, तीछन नाम-कुठार ॥ [2]
वेद, पुरान, भागवत, गीता, सब कौ यह मत सार ।
भव-समुद्र हरि-पद-नौका बिनु, कोउ न उतारै पार ॥ [3]
यह जिय जानि, इहीं छिन भजि, दिन बीते जात असार ।
सूर पाइ यह समौ लाहु लहि, दुर्लभ फिरि संसार ॥ [4]
- श्री सूरदास, सूरसागर
सब सांसारिक प्रपंचों को त्याग कर श्री हरि का भजन करो । किसी अन्य का भजन करने से काम नहीं चलेगा, और न ही यह भव जंजाल मिटेगा । [1]
जिस जिस योनि में भी जीव जन्म लेता है उस उस योनि में पाप का भार चढ़ता रहता है । इन पापों को काटने का समर्थ हथियार केवल श्री हरि का नाम है । [2]
वेद, पुराण, भागवत, गीता आदि सब का यही सार है कि भव समुद्र से पार होने के लिया केवल श्री हरि के चरण रूपी नौका का ही सहारा है । [3]
इस तत्वज्ञान को ह्रदय से जान कर, इसी क्षण से श्री हरि का भजन आरंभ कर देना चाहिए क्योंकि यह अवसर बीता जा रहा है । श्री सूरदास जी कहते हैं कि ऐसी दुर्लभ मानव देह को प्राप्त करके भी यदि भगवद्प्राप्ति नहीं की, तो फिर पुन: ऐसा अवसर कब मिलेगा? [4]

