ज्ञान मरै दै मुक्ति पद, कर्म मरै दै स्वर्ग - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (61)

ज्ञान मरै दै मुक्ति पद, कर्म मरै दै स्वर्ग - जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (61)

ज्ञान मरै दै मुक्ति पद, कर्म मरै दै स्वर्ग ।
अमर रहै इक भक्ति ही, चह न स्वर्ग अपवर्ग ॥

- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (61)

मोक्ष देकर ज्ञान समाप्त हो जाता है, स्वर्ग देकर अच्छा कर्म समाप्त हो जाता है । किंतु केवल एक भक्ति ही ऐसी है जो सदा अमर रहती है जहां भक्त को स्वर्ग, मोक्ष आदि की कामना नहीं होती ।