(राग माँड़)
बगुला भक्तन सों डरिये री ।
इक पग ठाढ़े ध्यान धरत हैं, दीन मीन लौं किमि बचिए री ।
ऊपर तें उज्जल रंग दीखत, हिये कपट हिंसक लखिये री ॥ [1]
इनतें दूरहि रहे भलाई, निकट गये फंदनि फँसिये री ।
जुगल प्रिया मायावी पूरे, भूलि न इन संग पल बसिए री ॥ [2]
- श्री जुगलप्रिया जी
बगुला भक्तों (ढोंग एवं पाखंड करने वाले भक्तों) से डरना चाहिए । जिस प्रकार एक बगुला एक पैर पर खड़ा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो वह एक पैर पर खड़ा होकर ध्यान कर रहा है, परंतु जैसे ही मछली उसके पास जाती है, वह तुरंत उस पर झपटा मारता है, और उस दीन मछली को अपना शिकार बना लेता है । ऐसे ही जो भक्तों का स्वाँग कर रहे ढोंगी भक्त होते हैं, वह ऊपर से तो बड़े उज्जवल रूप में दिखते हैं (अर्थात् वे भक्तों की तरह अपनी वेष वेशभूषा भी बना लेते हैं, प्रवचन भी करते हैं) परंतु ह्रदय से कपटी होते हैं और स्वभाव से उसी बगुले की तरह, हिंसक प्रवृति के होते हैं । [1]
ऐसे ढोंगी भक्तों से तो जितना दूर रहा जाए उतना ही जीव की भलाई है, क्योंकि इनके निकट जाते ही यह तुम्हें अपने चंगुल में फँसा लेंगें । श्री युगल प्रिया जी कहते हैं कि यह ढोंगी भक्त पूरे मायावी होते हैं, प्रभु का सच्चा प्रेम तो इनमें होता नहीं, इनका तो एक क्षण का संग भी नहीं करना चाहिए । [2]
बगुला भक्तन सों डरिये री ।
इक पग ठाढ़े ध्यान धरत हैं, दीन मीन लौं किमि बचिए री ।
ऊपर तें उज्जल रंग दीखत, हिये कपट हिंसक लखिये री ॥ [1]
इनतें दूरहि रहे भलाई, निकट गये फंदनि फँसिये री ।
जुगल प्रिया मायावी पूरे, भूलि न इन संग पल बसिए री ॥ [2]
- श्री जुगलप्रिया जी
बगुला भक्तों (ढोंग एवं पाखंड करने वाले भक्तों) से डरना चाहिए । जिस प्रकार एक बगुला एक पैर पर खड़ा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो वह एक पैर पर खड़ा होकर ध्यान कर रहा है, परंतु जैसे ही मछली उसके पास जाती है, वह तुरंत उस पर झपटा मारता है, और उस दीन मछली को अपना शिकार बना लेता है । ऐसे ही जो भक्तों का स्वाँग कर रहे ढोंगी भक्त होते हैं, वह ऊपर से तो बड़े उज्जवल रूप में दिखते हैं (अर्थात् वे भक्तों की तरह अपनी वेष वेशभूषा भी बना लेते हैं, प्रवचन भी करते हैं) परंतु ह्रदय से कपटी होते हैं और स्वभाव से उसी बगुले की तरह, हिंसक प्रवृति के होते हैं । [1]
ऐसे ढोंगी भक्तों से तो जितना दूर रहा जाए उतना ही जीव की भलाई है, क्योंकि इनके निकट जाते ही यह तुम्हें अपने चंगुल में फँसा लेंगें । श्री युगल प्रिया जी कहते हैं कि यह ढोंगी भक्त पूरे मायावी होते हैं, प्रभु का सच्चा प्रेम तो इनमें होता नहीं, इनका तो एक क्षण का संग भी नहीं करना चाहिए । [2]

