सदा सँधाती अपनौ जिय कौ जीवन-प्रान -  श्री सूरदास, सूर सागर

सदा सँधाती अपनौ जिय कौ जीवन-प्रान - श्री सूरदास, सूर सागर

सदा सँधाती अपनौ, जिय कौ जीवन-प्रान ।
सु तैं बिसारयौ सहज हीं, हरि, ईश्‍वर भगवान ॥

-  श्री सूरदास, सूर सागर

हे मन! जो भगवान (श्री हरि) सदा तुम्हारे साथ रहने वाला है, सदा तुम्हारी रक्षा करने वाला है एवं प्राणों का भी प्राण है, उस प्रभु को तूने अनायास ही, बातों ही बातों में भुला दिया है।