महिमा अमित कही न परै ।
शिव अज पद रज चाहत जाकी, सो तेरे पांव परै ।
एक सबल सर्वोपरि प्यारी, श्रुति नित सुयस ररै ॥ [1]
कोटि पतित पल-पल निस्तारत, सब भव ताप हरै ।
'भोरी' सठ की सब बनि आवैं, जो छिन चित्त धरै ॥ [2]
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (33)
हे श्री राधे! तुम्हारी अगाध महिमा कहते नहीं बनती । जो शिव, एवं ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण के चरणों की रज चाहते हैं, वही श्री कृष्ण तुम्हारे चरणों में पड़े रहते हैं ।
हे प्यारी जू! एक अति सबल स्वामिनी आप ही तो हो, श्रुतियाँ जिसका नित्य यश गान करती हैं । [1]
कोटि कोटि पापियों का पल पल आप उद्धार करती हो, एवं उनके समस्त भव ताप का हरण करती हो । श्री भोरी सखी जी कहते हैं कि दुष्ट स्वभाव वाले व्यक्तियों की भी सब बात बन जाये, यदि वे क्षण भर को भी अपने मन को तुममें लगा डालें । [2]
शिव अज पद रज चाहत जाकी, सो तेरे पांव परै ।
एक सबल सर्वोपरि प्यारी, श्रुति नित सुयस ररै ॥ [1]
कोटि पतित पल-पल निस्तारत, सब भव ताप हरै ।
'भोरी' सठ की सब बनि आवैं, जो छिन चित्त धरै ॥ [2]
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (33)
हे श्री राधे! तुम्हारी अगाध महिमा कहते नहीं बनती । जो शिव, एवं ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण के चरणों की रज चाहते हैं, वही श्री कृष्ण तुम्हारे चरणों में पड़े रहते हैं ।
हे प्यारी जू! एक अति सबल स्वामिनी आप ही तो हो, श्रुतियाँ जिसका नित्य यश गान करती हैं । [1]
कोटि कोटि पापियों का पल पल आप उद्धार करती हो, एवं उनके समस्त भव ताप का हरण करती हो । श्री भोरी सखी जी कहते हैं कि दुष्ट स्वभाव वाले व्यक्तियों की भी सब बात बन जाये, यदि वे क्षण भर को भी अपने मन को तुममें लगा डालें । [2]

