व्यास न कबहूँ उपजि है, विषयिनि कैं अनुराग ।
साधु-चरन रज पान बिनु, मिटै न उरकौ दाग ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (96)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि संतों की कृपा से विषयों के प्रति अनुराग जड़ से समाप्त हो गया है । बिना संत चरण रज पान किए ह्रदय के ताप कभी शांत नहीं होते ।
साधु-चरन रज पान बिनु, मिटै न उरकौ दाग ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (96)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि संतों की कृपा से विषयों के प्रति अनुराग जड़ से समाप्त हो गया है । बिना संत चरण रज पान किए ह्रदय के ताप कभी शांत नहीं होते ।

