नित नव दूलह-दुलहिनी, सुंदर सहज सुदेश ।
वदन जोति पर वारिये, कोटि कोटि राकेश ॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (3)
मनोहर देश श्री वृंदावन धाम में नित्य नवीन दूल्हा दुल्हन विराजमान हैं जिनकी बदन ज्योति पर कोटि कोटि चंद्रमाओं को न्यौछावर कर देना चाहिए ।
वदन जोति पर वारिये, कोटि कोटि राकेश ॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (3)
मनोहर देश श्री वृंदावन धाम में नित्य नवीन दूल्हा दुल्हन विराजमान हैं जिनकी बदन ज्योति पर कोटि कोटि चंद्रमाओं को न्यौछावर कर देना चाहिए ।

