अवतारी अवतार नहिं, ये दोऊ नित्य किसोर ।
नित अखंड विहरत विपिन, नहिं जानत निशि भोर ॥
- श्री चरण दास, भक्तिसागर
श्री वृंदावन धाम में अखंड नित्य विहार परायण श्री बिहारी बिहारिनी अवतार लीला से परे हैं, जो सदा नित्य किशोर रहते हैं एवं विहार में ऐसे उन्मत्त हैं कि दिन और रात भी नहीं जानते ।
नित अखंड विहरत विपिन, नहिं जानत निशि भोर ॥
- श्री चरण दास, भक्तिसागर
श्री वृंदावन धाम में अखंड नित्य विहार परायण श्री बिहारी बिहारिनी अवतार लीला से परे हैं, जो सदा नित्य किशोर रहते हैं एवं विहार में ऐसे उन्मत्त हैं कि दिन और रात भी नहीं जानते ।

