जिनहिं देखि हरि देखिये, तिनहिं भाव सों देखि ।
ए वे वे ए एक हैं, श्रीमुख कही विसेखि ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (11)
जिनके दर्शन करके श्रीहरि के दर्शन मिल पाते हैं, उन श्री गुरुदेव को भी उसी (हरि रूप) से ही देखिये । वे (श्रीहरि) और ये (श्रीगुरुदेव) दोनों एक ही हैं, यह बात सभी आचार्यों ने अपने श्रीमुख से विशेष रूप से, कही है ।
ए वे वे ए एक हैं, श्रीमुख कही विसेखि ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (11)
जिनके दर्शन करके श्रीहरि के दर्शन मिल पाते हैं, उन श्री गुरुदेव को भी उसी (हरि रूप) से ही देखिये । वे (श्रीहरि) और ये (श्रीगुरुदेव) दोनों एक ही हैं, यह बात सभी आचार्यों ने अपने श्रीमुख से विशेष रूप से, कही है ।

