करुणा करि अब लाडली दीनी सन्मुख ठौर - श्री हित गोपाल दास, निकुंज रस वल्लरी, आशीस दोहा (3)

करुणा करि अब लाडली दीनी सन्मुख ठौर - श्री हित गोपाल दास, निकुंज रस वल्लरी, आशीस दोहा (3)

करुणा करि अब लाडली, दीनी सन्मुख ठौर ।
प्रीती बढे तुम चरण में, सूझे न कोउ और ॥

- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी, आशीस दोहा (3)

हे लाड़िली जी (श्री राधा)! आपने बड़ी करुणा करी जिसके फल स्वरूप आपके अभिन्न स्वरूप श्री धाम वृंदावन में आपने अपने संग में मुझे वास दिया । बस अब यही आशा है कि क्षण क्षण आपके श्री चरणों में मेरी प्रीति बढ़ती रहे, और आपके अतिरिक्त अन्य किसी का भान न रहे ।