तनक मान मन में नहीं, सब सों राखत प्यार ।
नारायण ता संतपै, बार-बार बलिहार ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (87)
जिसके ह्रदय में तनिक भी मान की चाह न हो, और सब से प्रेम रखे, ऐसे संतों पर मैं बार बार बलिहार जाता हूँ ।
नारायण ता संतपै, बार-बार बलिहार ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (87)
जिसके ह्रदय में तनिक भी मान की चाह न हो, और सब से प्रेम रखे, ऐसे संतों पर मैं बार बार बलिहार जाता हूँ ।

