न्यारौ सब ब्रह्मांड ते, निज वृंदावन नित्त ।
मायाकाल कलेस तहँ, व्याप्त नाहीं मित्त ॥
- श्री सरस माधुरी
हे मित्र, श्री राधा कृष्ण का नित्य धाम श्री वृंदावन समस्त ब्रह्मांड से न्यारा है एवं उनका निज धाम है जो मायाकाल एवं क्लेश आदि से परे है ।
मायाकाल कलेस तहँ, व्याप्त नाहीं मित्त ॥
- श्री सरस माधुरी
हे मित्र, श्री राधा कृष्ण का नित्य धाम श्री वृंदावन समस्त ब्रह्मांड से न्यारा है एवं उनका निज धाम है जो मायाकाल एवं क्लेश आदि से परे है ।

