निरख रूप छवि माधुरी, चलत न नैनन नीर  - श्री ललित लड़ैती, माधुर्य रस दोहावली (186)

निरख रूप छवि माधुरी, चलत न नैनन नीर - श्री ललित लड़ैती, माधुर्य रस दोहावली (186)

निरख रूप छवि माधुरी, चलत न नैनन नीर ।
ललित लड़ैती जानिए, ते पाषाण शरीर ॥

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (186)

श्री राधा कृष्ण की मधुर रूप की छवि को निहार कर जिसके नेत्रों से आँसू नहीं बहते उस ह्रदय को पत्थर समान समझना चाहिए ।