(कवित्त)
जानते नहीं हैं तन्त्र मन्त्र यन्त्र साधना कूँ,
सधवे की साधना सदैव सौ संवारे हैं। [1]
जब सौं निरीह नेह नैक कृपा दृष्टि करी,
तभी ते ताकिबे की गरिमा गुवारे हैं॥ [2]
भूलि चुके वो तो जानत हैं ऐतौ तौऊ,
फेरि फेरि फिरिवे की फिरकी फुहारे हैं। [3]
सर्व विधिहीन सौं विहीन तौऊ दृढ़ता वर,
एक ही सबारो 'प्रेम' बिहारी जी हमारे हैं॥ [4]
- श्री प्रेम जी
मैं तन्त्र, मन्त्र, यन्त्र अथवा अन्य कोई साधना नहीं जानता, मैं तो एकमात्र श्री बाँके बिहारी जी को ही जानता हूँ एवं उन्हीं के चरणों की शरण में रहता हूँ। [1]
जब से श्री बिहारी जी ने मुझ पर अपनी थोड़ी सी कृपा दृष्टि डाली है, तभी से मेरी दृष्टि एवं मनोरथ सफल हुए हैं। [2]
हम तो बिहारीजी को भूले हुए हैं परंतु वो हमें नहीं भूलते, एवं समस्त प्रकार की गलतियों को माफ़ करते रहते हैं, इसलिए तो उन्होंने मुझे सांसारिक चक्करों से छुड़ा कर अपने श्री चरणों में रख लिया है। [3]
वैसे तो मैं सर्व विधिहीन एवं समस्त प्रकार की साधनाओं से विहीन हूँ, परंतु फिर भी दृढ़ता पूर्वक अपने इस सम्बंध को "श्री बिहारी जी ही मेरे हैं" सदा ह्रदय में धारण करके रखता हूँ। [4]
जानते नहीं हैं तन्त्र मन्त्र यन्त्र साधना कूँ,
सधवे की साधना सदैव सौ संवारे हैं। [1]
जब सौं निरीह नेह नैक कृपा दृष्टि करी,
तभी ते ताकिबे की गरिमा गुवारे हैं॥ [2]
भूलि चुके वो तो जानत हैं ऐतौ तौऊ,
फेरि फेरि फिरिवे की फिरकी फुहारे हैं। [3]
सर्व विधिहीन सौं विहीन तौऊ दृढ़ता वर,
एक ही सबारो 'प्रेम' बिहारी जी हमारे हैं॥ [4]
- श्री प्रेम जी
मैं तन्त्र, मन्त्र, यन्त्र अथवा अन्य कोई साधना नहीं जानता, मैं तो एकमात्र श्री बाँके बिहारी जी को ही जानता हूँ एवं उन्हीं के चरणों की शरण में रहता हूँ। [1]
जब से श्री बिहारी जी ने मुझ पर अपनी थोड़ी सी कृपा दृष्टि डाली है, तभी से मेरी दृष्टि एवं मनोरथ सफल हुए हैं। [2]
हम तो बिहारीजी को भूले हुए हैं परंतु वो हमें नहीं भूलते, एवं समस्त प्रकार की गलतियों को माफ़ करते रहते हैं, इसलिए तो उन्होंने मुझे सांसारिक चक्करों से छुड़ा कर अपने श्री चरणों में रख लिया है। [3]
वैसे तो मैं सर्व विधिहीन एवं समस्त प्रकार की साधनाओं से विहीन हूँ, परंतु फिर भी दृढ़ता पूर्वक अपने इस सम्बंध को "श्री बिहारी जी ही मेरे हैं" सदा ह्रदय में धारण करके रखता हूँ। [4]

