जाकौं चाहैं लाडिली - श्री ललित किशोरी देव जी की बानी, सिद्धान्त की साखी (500)

जाकौं चाहैं लाडिली - श्री ललित किशोरी देव जी की बानी, सिद्धान्त की साखी (500)

जाकौं चाहैं लाडिली, ताकौं सब सुख होइ।
प्रेम प्रिया बिन ना मिलै, यह जानत सब कोइ ॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जी की बानी, सिद्धान्त की साखी (500)

जिसको श्री कुंजबिहारिनी लाड़ली जू [श्री राधा] चाहती हैं उसको ही सब सुख सहजता से प्राप्त हो जाता है । यह बात को सब जानते हैं कि प्रिया प्रियतम के निजमहल का दिव्य प्रेम श्री प्यारी जू की कृपा के बिना प्राप्त नहीं होता ।