नवल प्रिया कृपालू ऐसी - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (103)

नवल प्रिया कृपालू ऐसी - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (103)

(राग खमाज, त्रिताल)
नवल प्रिया कृपालू ऐसी ।
कैसेहुँ चरण शरण में आवें, बाधा मिट जाय जैसी ॥ [1]
प्रिया स्वभाव मृदुलता नीकी, संग सहचरी वैसी ।
श्रीगोपालहित लली प्रिया पै, वारौं उमा कमलासी ॥ [2]

- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (103)

नित्य किशोरी श्रीराधा अत्यंत कृपालु हैं। कोई कितना बड़ा अपराधी ही क्यों न हो, श्री राधा के चरण कमलों की शरण में आते ही समस्त बाधाएं सहजता से दूर हो जाती हैं। [1]

श्री प्रिया जी का स्वाभाव अत्यंत कोमल है एवं उनकी सेवा में उपस्थित सहचरियाँ भी उन्हीं के जैसी हैं। श्री हित गोपालदास जी श्री प्रिया जी पर उमा, रमा आदि देवियों को भी न्योंछावर करते हैं। [2]