अब तौ आहि यहै भली - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (20)

अब तौ आहि यहै भली - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (20)

अब तौ आहि यहै भली, सबतैं मोह मिटाइ।
रसिक अनन्यनि संग गहि, स्यामा-स्याम लड़ाइ॥

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (20)

अब तो सबसे भली यही है कि सब से मोह मिटा कर रसिक अनन्यों का संग करके श्यामा श्याम को लाड़-प्यार करना चाहिए ।