सुखनिधि सुन्दरि सरसनी - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (92)

सुखनिधि सुन्दरि सरसनी - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (92)

सुखनिधि सुन्दरि सरसनी, सुनि स्वामिनि मोरी जु।
दासी तिहारी जय प्रिया, श्री राधा गोरी जू॥

- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (92)

हे सुख-समुद्र रूपा सुंदरी जू, हे स्वामिनी जू! मेरी बात सुनिए, आप ही रस-उद्दीपन करने वाली हैं। हे श्री राधा गोरी जू, हे प्रिया जू! आपकी सदा जय हो, आप मुझ पर ऐसी कृपा करें, जिससे मैं आपकी सदा दासी रहूँ।