को पूजै अब देवी-देवा।
सकल निगम आगम को सरबसु, गौर-स्याम की पाई सेवा॥ [1]
कहौ निबोरी सँचै कौन विधि, जाकी रसना चाखी मेवा।
कृपा गुरुन की रतनअली नैं, पायौ गूढ़ तत्त्व कौ भेवा॥ [2]
- श्री रतन अलि (ललित संप्रदाय के रसिक भक्त)
वेदों और शास्त्रों के सार को धारण करने वाले युगल किशोर श्री राधा कृष्ण की सेवा प्राप्त करने के बाद अब देवी-देवताओं की पूजा कौन करेगा? [1]
जिसकी रसना ने मेवा की मिठास पा ली अब वो कड़वे नीम के फल को क्यों खाएगा? श्री रतन अली कहते हैं कि, गुरु की कृपा से, उन्हें युगल जोड़ी के निज महल के रहस्य को समझने का सौभाग्य मिला है, जो अति गूढ़ है। [2]
सकल निगम आगम को सरबसु, गौर-स्याम की पाई सेवा॥ [1]
कहौ निबोरी सँचै कौन विधि, जाकी रसना चाखी मेवा।
कृपा गुरुन की रतनअली नैं, पायौ गूढ़ तत्त्व कौ भेवा॥ [2]
- श्री रतन अलि (ललित संप्रदाय के रसिक भक्त)
वेदों और शास्त्रों के सार को धारण करने वाले युगल किशोर श्री राधा कृष्ण की सेवा प्राप्त करने के बाद अब देवी-देवताओं की पूजा कौन करेगा? [1]
जिसकी रसना ने मेवा की मिठास पा ली अब वो कड़वे नीम के फल को क्यों खाएगा? श्री रतन अली कहते हैं कि, गुरु की कृपा से, उन्हें युगल जोड़ी के निज महल के रहस्य को समझने का सौभाग्य मिला है, जो अति गूढ़ है। [2]

