(राग धनाश्री)
जौ हम भले बुरे तौ तेरे ।
तुम्हैं हमारी लाज-बड़ाई, बिनती सुन प्रभु मेरे ॥ [1]
सब तजि तुम सरनागत आयौ, दृढ़ करि चरन गहेरे ।
तुम प्रताप-बल बदत न काहूँ, निडर भए सब चेरे ॥ [2]
और देव सब रंक भिखारी, त्यागे बहुत अनेरे ।
सूरदास प्रभु तुम्हरी कृपा तै, पाए सुख जु घनेरे ॥ [3]
- श्री सूरदास, सूरसागर
चाहे हम अच्छे हों या बुरे, हैं तो हम आपके ही ।हे प्रभु! हमारी लाज और प्रसिद्धि आपके ही हाथों में है; कृपया मेरी प्रार्थना सुनें! [1]
सब को त्याग कर ही मैं आपकी शरण में आया हूँ, अब आपके श्री चरणों को दृढ़ता से पकड़ लिया है।आपकी महिमा के बल से मैं किसी की परवाह नहीं करता । आपके समस्त सेवकों सब आपके भरोसे निर्भय हो गये हैं । [2]
और सब देवता तो बेचारे भिखारियों के समान हैं, सबको मैंने निकम्मा समझकर त्याग दिया है। श्री सूरदास जी कहते हैं, "हे भगवान कृष्ण, आपकी ही कृपा से तो मैंने अत्यधिक सुख प्राप्त किया है ।" [3]
जौ हम भले बुरे तौ तेरे ।
तुम्हैं हमारी लाज-बड़ाई, बिनती सुन प्रभु मेरे ॥ [1]
सब तजि तुम सरनागत आयौ, दृढ़ करि चरन गहेरे ।
तुम प्रताप-बल बदत न काहूँ, निडर भए सब चेरे ॥ [2]
और देव सब रंक भिखारी, त्यागे बहुत अनेरे ।
सूरदास प्रभु तुम्हरी कृपा तै, पाए सुख जु घनेरे ॥ [3]
- श्री सूरदास, सूरसागर
चाहे हम अच्छे हों या बुरे, हैं तो हम आपके ही ।हे प्रभु! हमारी लाज और प्रसिद्धि आपके ही हाथों में है; कृपया मेरी प्रार्थना सुनें! [1]
सब को त्याग कर ही मैं आपकी शरण में आया हूँ, अब आपके श्री चरणों को दृढ़ता से पकड़ लिया है।आपकी महिमा के बल से मैं किसी की परवाह नहीं करता । आपके समस्त सेवकों सब आपके भरोसे निर्भय हो गये हैं । [2]
और सब देवता तो बेचारे भिखारियों के समान हैं, सबको मैंने निकम्मा समझकर त्याग दिया है। श्री सूरदास जी कहते हैं, "हे भगवान कृष्ण, आपकी ही कृपा से तो मैंने अत्यधिक सुख प्राप्त किया है ।" [3]

