शस्त्रवद्घातकं शास्त्रं - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधासप्तशती (7.105)

शस्त्रवद्घातकं शास्त्रं - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधासप्तशती (7.105)

शस्त्रवद्घातकं शास्त्रं - कीनाशमिव मानुषम्।
गुणाढ्यमपि जानीहि येन राधा न कीर्तिता॥

- श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधासप्तशती (7.105)

जिसने श्रीराधा का यशोगान नहीं किया, वह शास्त्र शस्त्र के समान घातक है तथा जिसने श्री राधा के नाम और गुण नहीं गाये, वह मनुष्य गुण सम्पन्न होने पर भी कसाई के समान क्रूर है।