जो करै भजन में अंतरौ, तासौं करि बैराग।
समिलित साधन श्रम बढै, घटै सबै अनुराग॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (565)
जो तुम्हारी नित्य विहार उपासना में अंतर डाल दे, उन सब से तुमको भली भाँति वैराग्य कर लेना चाहिए । सम्मिलित साधना करने से तो केवल परिश्रम ही होगा, तुम्हारी अनन्य उपासना का अनुराग तो क्रम क्रम घटता चला जाएगा ।
समिलित साधन श्रम बढै, घटै सबै अनुराग॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (565)
जो तुम्हारी नित्य विहार उपासना में अंतर डाल दे, उन सब से तुमको भली भाँति वैराग्य कर लेना चाहिए । सम्मिलित साधना करने से तो केवल परिश्रम ही होगा, तुम्हारी अनन्य उपासना का अनुराग तो क्रम क्रम घटता चला जाएगा ।

