रसिक भक्त सौं हित करै - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (27)

रसिक भक्त सौं हित करै - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (27)

रसिक भक्त सौं हित करै, अंतरपटहि निवारि।
वृन्दावन हित तब लसैं, उर वर पिय-सुकुमारि॥

- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (27)

जब जीव किसी वास्तविक रसिक संत से अनन्य प्रेम करके ह्रदय की मैल का पूर्ण निवारण कर लेता है तब ह्रदय में श्री लाड़ली लाल प्रेमपूर्वक खेलने (लीला प्रवेश) लगते हैं।