सुनो जी कानैं नूपूररो झनकार - श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (32)

सुनो जी कानैं नूपूररो झनकार - श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (32)

सुनो जी कानैं नूपूररो झनकार ।
कुंवर लडैती करहु आपनी, दरसों नित्य बिहार ॥ [1]
यह तन तजि तन परिकर पाऊँ, श्री ललिता प्राण आधार ।
तुव जस कुंजन कुंजन गाऊँ, (जय श्री) वंशी अलि बलिहार ॥ [2]

- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (32)

श्री राधा जू के चरणों के नूपुर की झंकार को अपने कानों से सुना है । हे किशोरी लड़ैती जू, अब ऐसी कृपा हो कि आप मुझे अपना बनाकर, अपने परम अंतरंग नित्य विहार का दर्शन करवाओ । [1]

इस मायाजनित तन को त्याग, सखी देह को प्राप्त कर, तुम्हारी प्राण आधार श्री ललिता जू के परिकर में पहुँच जाऊँ । श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि हे लाड़ली जू, तुम्हारे प्रेम में उन्मत्त होकर तुम्हारे यशोगान को कुंज कुंज में गाती फिरूँ और तुम पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दूँ । [2]