माऽस्तु मम कदापि पापरूपिणो - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.80)

माऽस्तु मम कदापि पापरूपिणो - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.80)

माऽस्तु मम कदापि पापरूपिणो नरकादुद्धारः किन्तु।
श्रीवृन्दावन-राधा-तन्नागरनाम-विस्मृतिं नैतु॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.80)

मुझ घोर पापी का भले कभी भी नरक से भी उद्धार न हो, किन्तु श्रीवृन्दावन-नाम, श्रीराधा नाम तथा श्रीराधानागर [कृष्ण] के नाम को कभी न भूलूं।