सिर काटौ पावक जरौ बूड़ि मरौ विष खाउं।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै अनत न कित हूँ जाउँ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (10)
भले ही मेरा सिर काट दिया जाए, आग में झोंक दिया जाए, पानी में डुबो दिया जाए, या जहर पीने के लिए मजबूर किया जाए, फिर भी मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं श्री धाम वृन्दावन को कभी नहीं त्याग कर जाऊँगा ।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै अनत न कित हूँ जाउँ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (10)
भले ही मेरा सिर काट दिया जाए, आग में झोंक दिया जाए, पानी में डुबो दिया जाए, या जहर पीने के लिए मजबूर किया जाए, फिर भी मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं श्री धाम वृन्दावन को कभी नहीं त्याग कर जाऊँगा ।

