अष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं - श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.2)

अष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं - श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.2)

अष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं, टहल करत नित धाम।
कमला दासी लौं फिरति, महल-टहल दिन जाम॥

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.2)

श्री बरसाना धाम की जय हो जहाँ अष्ट सिद्धि एवं नवों निधि विचरण करते हैं, और जहाँ श्री लक्ष्मी जी दासी बनकर श्री राधारानी के महल की सेवा प्राप्ति हेतु दिन-रात घूम रही हैं।