नयन ही में नयन रहें हिय में हियो समाय - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (8)

नयन ही में नयन रहें हिय में हियो समाय - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (8)

नयन ही में नयन रहें, हिय में हियो समाय।
भुजन भुजा लपटी रहें, यही एक रस भाय॥

- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (8)

 श्री राधा के नयनों से श्री कृष्ण के नयन मिलते रहें, ह्रदय में ह्रदय समाया हो, भुजाओं से भुजाएँ लिपटी हों—बस यही (नित्य विहार) रस ह्रदय को भाता है।