जहाँ-जहाँ बच्छा फिरै - श्री मलूक दास

जहाँ-जहाँ बच्छा फिरै - श्री मलूक दास

जहाँ-जहाँ बच्छा फिरै, तहाँ-तहाँ फिरे गाय।
कहैं मलूक जहाँ संत जन, तहाँ रमैया जाय॥

- श्री मलूक दास

जहां जहां बछड़ा जाता है वहाँ वहाँ गाय पीछे पीछे जाती है । श्री मलूक दास कहते हैं कि उसी प्रकार जहां जहां संत जन जाते हैं वहीं पीछे पीछे भगवान पहुँच जाते हैं ।