कान कथा मन ध्यान, रसना नाम अधार धरि।
नयनन गति नहिं आन, बिन देखे मुख माधुरी॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (26)
कानों का विश्राम श्री श्यामाश्याम की कथा में है, मन का ध्यान में, रसना का उनके नाम में एवं आँखों का विश्राम उनकी रूप माधुरी है।
नयनन गति नहिं आन, बिन देखे मुख माधुरी॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (26)
कानों का विश्राम श्री श्यामाश्याम की कथा में है, मन का ध्यान में, रसना का उनके नाम में एवं आँखों का विश्राम उनकी रूप माधुरी है।

