(राग कान्हरो)
राधा रसिक कुंजबिहारी कहत जु हौं
न कहूँ गयौ सुनि सुनि राधे तेरी सौं ॥ [1]
मोहिं न पत्याहु तौ संग हरिदासी हुती
बूझि देखि भटू कहिधौं कहा भयौ मेरी सौं ॥ [2]
प्यारी तोहिं गठौंद न प्रतीति छाँड़ि छिया
जानि दे इतनीब एरी सौं । [3]
गहि लपटाइ रहे छैल दोऊ
छाती सौं छाती लगाई फेरा फेरी सौं ॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (25)
रसिक श्री कुंजबिहारी श्री राधा से कहते हैं - प्यारी राधे, सुनो! आपकी सौगंध, में आपको छोड़ कर कहीं नहीं गया । [1]
यदि आपके हृदय में संदेह उत्पन्न हो रहा तो श्री हरिदासी सखी जो संग में है उनसे कृपा कर पूछिए । श्री कुंजबिहारी श्री हरिदासी से कहते हैं कि हे सखी, मेरी शपथ खाकर बताओ कि क्या हुआ था । [2]
श्रीहरिदासी श्रीराधा से कहती हैं कि हे प्रिया जू, क्या आपको उनकी प्रतिज्ञा पर विश्वास नहीं है? कृपया कर अपने मान को त्याग दें, मैं आपसे विनम्र प्रार्थना करती हूं । [3]
श्री हरिदासी के वचन सुनकर दोनों छैल (प्रिया प्रियतम) ने एक-दूसरे को गले लगा लिया और नित्य विहार में अंग से अंग मिला कर लिपट गये । [4]
राधा रसिक कुंजबिहारी कहत जु हौं
न कहूँ गयौ सुनि सुनि राधे तेरी सौं ॥ [1]
मोहिं न पत्याहु तौ संग हरिदासी हुती
बूझि देखि भटू कहिधौं कहा भयौ मेरी सौं ॥ [2]
प्यारी तोहिं गठौंद न प्रतीति छाँड़ि छिया
जानि दे इतनीब एरी सौं । [3]
गहि लपटाइ रहे छैल दोऊ
छाती सौं छाती लगाई फेरा फेरी सौं ॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (25)
रसिक श्री कुंजबिहारी श्री राधा से कहते हैं - प्यारी राधे, सुनो! आपकी सौगंध, में आपको छोड़ कर कहीं नहीं गया । [1]
यदि आपके हृदय में संदेह उत्पन्न हो रहा तो श्री हरिदासी सखी जो संग में है उनसे कृपा कर पूछिए । श्री कुंजबिहारी श्री हरिदासी से कहते हैं कि हे सखी, मेरी शपथ खाकर बताओ कि क्या हुआ था । [2]
श्रीहरिदासी श्रीराधा से कहती हैं कि हे प्रिया जू, क्या आपको उनकी प्रतिज्ञा पर विश्वास नहीं है? कृपया कर अपने मान को त्याग दें, मैं आपसे विनम्र प्रार्थना करती हूं । [3]
श्री हरिदासी के वचन सुनकर दोनों छैल (प्रिया प्रियतम) ने एक-दूसरे को गले लगा लिया और नित्य विहार में अंग से अंग मिला कर लिपट गये । [4]

