(राग जैजैवन्ती)
आवौ सखी मिलि मंगल गावौ,
मेरे पधारे कुँवर कन्हाई। [1]
मोसम आज कौन बड़भागिनि,
घर बैठे ऐसी निधि पाई॥ [2]
सुंदर वदन मदन मनमोहन,
मधुर मधुर बोलत सुखदाई। [3]
नारायण इनके दरशन सों,
मुरझी बेलि हरी ह्वै आई॥ [4]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (15)
आओ सखी, हम मिलकर मंगल गान करें, मेरे द्वार पर आज कुंवर कन्हैया पधारे हैं। [1]
घर बैठे मैंने परम निधि प्राप्त कर लिया है, मेरे समान सुन्दर भाग्य आज और किसका होगा ? [2]
मदन मनमोहन श्री कृष्ण का वदन अति सुन्दर है एवं मधुर-मधुर बोलकर सुख प्रदान कर रहे हैं। [3]
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि श्री कृष्ण के दर्शन से मुरझाई हुई लता भी हरी हो गयी है। [4]
आवौ सखी मिलि मंगल गावौ,
मेरे पधारे कुँवर कन्हाई। [1]
मोसम आज कौन बड़भागिनि,
घर बैठे ऐसी निधि पाई॥ [2]
सुंदर वदन मदन मनमोहन,
मधुर मधुर बोलत सुखदाई। [3]
नारायण इनके दरशन सों,
मुरझी बेलि हरी ह्वै आई॥ [4]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, प्रेम परीक्षा लीला (15)
आओ सखी, हम मिलकर मंगल गान करें, मेरे द्वार पर आज कुंवर कन्हैया पधारे हैं। [1]
घर बैठे मैंने परम निधि प्राप्त कर लिया है, मेरे समान सुन्दर भाग्य आज और किसका होगा ? [2]
मदन मनमोहन श्री कृष्ण का वदन अति सुन्दर है एवं मधुर-मधुर बोलकर सुख प्रदान कर रहे हैं। [3]
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि श्री कृष्ण के दर्शन से मुरझाई हुई लता भी हरी हो गयी है। [4]

