भाव प्रेम अरु नेम है, भाव ही साधन सार।
रूप माधुरी भाव बिन, भटके बारम्बर॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, भाव महिमा अंग (4)
भाव ही प्रेम और नियम है एवं भाव ही साधन का सार है । श्री रूपमधुरी जी कहते हैं कि भाव के बिना जीव संसार में ही बार बार भटकता रहता है।
रूप माधुरी भाव बिन, भटके बारम्बर॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, भाव महिमा अंग (4)
भाव ही प्रेम और नियम है एवं भाव ही साधन का सार है । श्री रूपमधुरी जी कहते हैं कि भाव के बिना जीव संसार में ही बार बार भटकता रहता है।

