वृन्दारण्येशभक्तिः कमलभवशिवेन्द्रा - श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (99)

वृन्दारण्येशभक्तिः कमलभवशिवेन्द्रा - श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (99)

वृन्दारण्येशभक्तिः कमलभवशिवेन्द्रादिभिर्देववृन्दैर्मग्या यद्वासचेतः कर्रामह तु जनं मार्गयन्ती सदास्ते।
राधा यन्नामधेयश्रवणकरमपि स्वीयमामन्यतेऽर्मु तस्मै कुण्डाय नित्यं चटुभिरभिभृतां संनतिं हन्त कुर्मः॥
- श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (99)


वृन्दावनेश्वर श्री कृष्ण की भक्ति का मार्ग लक्ष्मी, ब्रह्मा, शिव, इंद्र आदि देव वृन्द ढूंढते हैं लेकिन प्राप्त नहीं कर पाते। परन्तु राधाकुण्ड में वास करने की कामना करने वाले मनुष्यों को भक्ति स्वयं ढूंढ़ती फिरती है। जिस कुण्ड के नाम के सुनने वाले को भी श्री राधा अपना मानतीं हैं, हम उस कुण्ड को नित्य स्तुतियों द्वारा सादर प्रणाम करते हैं।