साधन छाँड़ि अनेक विधि - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (22)

साधन छाँड़ि अनेक विधि - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (22)

साधन छाँड़ि अनेक विधि परि रहु द्वारे आय।
अपनो जानि निबाहिहैं करि कै कोउ उपाय॥

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (22)

हे श्री राधा, मैं समस्त साधनों को छोड़कर आपके द्वार पर आकर पड़ा हूँ, मुझे अपना मानकर किसी भी उपाय से मुझे अपनी सेवा प्रदान कीजिए।