(राग ईमन)
छबीली बिहारिनि की छबि पर बलिहारी।
ब्रज-नव- तरुनि-सिरोमनि स्यामा बस किए कुंज बिहारी॥ [1]
सीस चंद्रिका सोहत मोहत नीलबरन तन सारी।
“ब्रजनिधि" की स्वामिनि अभिरामिनि होत न हिय तें न्यारी॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (62)
छबीली बिहारिनि श्री राधा जू की छवि पर मैं स्वयं को न्योंछावर करता हूँ। ब्रज की नित्य नवल किशोरी, सखियों की शिरोमणि, श्री श्यामा जू ने कुञ्ज-बिहारी श्री कृष्ण को अपने वश में कर रखा है। [1]
श्री श्यामा जू के शीश पर चन्द्रिका सुशोभित है, तन पर शोभायमान नीलवर्ण की साड़ी मन को मोहनेवाली है। श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि मेरे ह्रदय में रमण करनेवाली मेरी स्वामिनी श्री राधा एक क्षण के लिए भी मेरे ह्रदय से जाती नहीं। [2]
छबीली बिहारिनि की छबि पर बलिहारी।
ब्रज-नव- तरुनि-सिरोमनि स्यामा बस किए कुंज बिहारी॥ [1]
सीस चंद्रिका सोहत मोहत नीलबरन तन सारी।
“ब्रजनिधि" की स्वामिनि अभिरामिनि होत न हिय तें न्यारी॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (62)
छबीली बिहारिनि श्री राधा जू की छवि पर मैं स्वयं को न्योंछावर करता हूँ। ब्रज की नित्य नवल किशोरी, सखियों की शिरोमणि, श्री श्यामा जू ने कुञ्ज-बिहारी श्री कृष्ण को अपने वश में कर रखा है। [1]
श्री श्यामा जू के शीश पर चन्द्रिका सुशोभित है, तन पर शोभायमान नीलवर्ण की साड़ी मन को मोहनेवाली है। श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि मेरे ह्रदय में रमण करनेवाली मेरी स्वामिनी श्री राधा एक क्षण के लिए भी मेरे ह्रदय से जाती नहीं। [2]

