ललित लता मन्दिर के आंगन प्रातसमैं राजत पिय प्यारी।
प्रीतम कौ पट पीत प्रिया पै ओढ़ै लाल प्रिया की सारी॥ [1]
शिथिल शरीर नखर उर अंकित विथुरी अलकन की छवि न्यारी।
उठत अनङ्ग तरङ्गन की दुति अङ्ग अङ्ग रुचि मङ्गलकारी॥ [2]
करत विशाखा चमर चतुर इत उत ललिता ठाड़ी लियें झारी।
निरखत रामराय दम्पति छवि नैन चकोरी टरत न टारी॥ [3]
- श्री रामराय जी, आदिवाणी (10)
प्रातः काल के समय श्री राधा कृष्ण सुन्दर लता मंदिर के आंगन में विराजमान हैं। श्री प्रिया जी श्री कृष्ण की पीताम्बरी ओढ़े हुए हैं एवं श्री कृष्ण श्री प्रिया जी की नीली साड़ी ओढ़े हुए हैं। [1]
युगल किशोर के तन शिथिल हैं, हृदयदेश में नखचन्द्र चिन्ह अंकित हैं, अलकें अस्त-व्यस्त हैं, जिसकी छवि न्यारी है। दोनों के अंग-अंग में प्रेम-तरंग की द्युति उठ रही है, जो दोनों को रुचिकर है, दोनों के लिए मंगलकारी है। [2]
श्री विशाखा सखी श्री श्यामाश्याम को चँवर डुला रही हैं एवं श्री ललिता सखी जल की झारी लिए पास में खड़ी हैं। श्री रामराय जी कहते हैं कि "नित्य दम्पति श्री श्यामाश्याम की सुन्दर छवि को देखकर मेरे नेत्र चकोर की भांति उन्हें निहार रहे हैं, उनपर से दृष्टि हटाए नहीं हटती।" [3]
प्रीतम कौ पट पीत प्रिया पै ओढ़ै लाल प्रिया की सारी॥ [1]
शिथिल शरीर नखर उर अंकित विथुरी अलकन की छवि न्यारी।
उठत अनङ्ग तरङ्गन की दुति अङ्ग अङ्ग रुचि मङ्गलकारी॥ [2]
करत विशाखा चमर चतुर इत उत ललिता ठाड़ी लियें झारी।
निरखत रामराय दम्पति छवि नैन चकोरी टरत न टारी॥ [3]
- श्री रामराय जी, आदिवाणी (10)
प्रातः काल के समय श्री राधा कृष्ण सुन्दर लता मंदिर के आंगन में विराजमान हैं। श्री प्रिया जी श्री कृष्ण की पीताम्बरी ओढ़े हुए हैं एवं श्री कृष्ण श्री प्रिया जी की नीली साड़ी ओढ़े हुए हैं। [1]
युगल किशोर के तन शिथिल हैं, हृदयदेश में नखचन्द्र चिन्ह अंकित हैं, अलकें अस्त-व्यस्त हैं, जिसकी छवि न्यारी है। दोनों के अंग-अंग में प्रेम-तरंग की द्युति उठ रही है, जो दोनों को रुचिकर है, दोनों के लिए मंगलकारी है। [2]
श्री विशाखा सखी श्री श्यामाश्याम को चँवर डुला रही हैं एवं श्री ललिता सखी जल की झारी लिए पास में खड़ी हैं। श्री रामराय जी कहते हैं कि "नित्य दम्पति श्री श्यामाश्याम की सुन्दर छवि को देखकर मेरे नेत्र चकोर की भांति उन्हें निहार रहे हैं, उनपर से दृष्टि हटाए नहीं हटती।" [3]

