श्री ललिता हरिवंश वपु, प्रगटी रसनिधि आय।
चरन माधुरी कुंवर की, दीनी सबन जनाय॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (16)
श्री वंशी अलि जी के अनुसार स्वयं श्री ललिता जी ही श्री हित हरिवंश के स्वरूप में कुँवरि श्री राधा की चरण माधुरी को विश्व में प्रकाशित करने हेतु इस धरा पर प्रकट हुई थी।
चरन माधुरी कुंवर की, दीनी सबन जनाय॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (16)
श्री वंशी अलि जी के अनुसार स्वयं श्री ललिता जी ही श्री हित हरिवंश के स्वरूप में कुँवरि श्री राधा की चरण माधुरी को विश्व में प्रकाशित करने हेतु इस धरा पर प्रकट हुई थी।

