कोऊ गणेश महेश दिनेशहि - ब्रज के सवैया

कोऊ गणेश महेश दिनेशहि - ब्रज के सवैया

कोऊ गणेश महेश दिनेशहि, सेवों सदैव करौं मनुहारी।
तीरथ तीर बसौं बिन जाय, उपाय करो वस मुक्त विचारी॥ [1]
एकैहि आंक अदां को अनूप, कहों अपने जिय की जसधारी।
मोहि भरोसौ खरौसौ भयो, भजु कुञ्जविहारिन कुञ्जबिहारी॥ [2]

- ब्रज के सवैया

कोई चाहे गणेश, शिव या सूर्य की सदा सेवा करे, मनोहर पूजा करे। कोई तीर्थों में वास करे और मुक्ति पाने के लिए उपाय करता रहे। [1]

मैं केवल एक अनुपम स्वरूप को साध्य मानता हूँ और यह अपने मन की बात उजागर कर रहा हूँ। मेरा पूर्ण भरोसा केवल कुञ्जविहारिन (श्री राधा) एवं कुञ्जबिहारी (श्री कृष्ण) पर ही है, अतः मैं उनका ही अनन्य भाव से भजन करता हूँ। [2]