पंच उपास में हैं नहीं, ये दोउ युगल स्वरूप।
रसिकन के ये धन परम, राख हिये में गूप॥
- श्री चरण दास, भक्तिसागर
युगल किशोर श्री श्यामाश्याम शास्त्रों में वर्णित पाँच देवों की उपासना से परे हैं। ये तो रसिकों के परम धन हैं, जो उनके ह्रदय में स्थित अति गोपनीय हैं।

