रे मन तज सुख विषय रस वस वृन्दावन धाम।
ललित लड़ैती मिल रसिक रट मुख राधा श्याम॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (23)
हे मन, विषय भोग के सुख का त्याग कर श्री वृन्दावन धाम में वास कर। रसिकों का संग कर और मुख से "राधे श्याम" रट।
ललित लड़ैती मिल रसिक रट मुख राधा श्याम॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (23)
हे मन, विषय भोग के सुख का त्याग कर श्री वृन्दावन धाम में वास कर। रसिकों का संग कर और मुख से "राधे श्याम" रट।

