धन्येयं धरणी ततोऽपि - श्री राधा सूक्ति

धन्येयं धरणी ततोऽपि - श्री राधा सूक्ति

धन्येयं धरणी ततोऽपि मथुरा तत्रापि वृन्दावनं तत्रापि व्रजवासिनो युवतयस्तत्रापि गोपाङ्गना:।
तत्राचिन्त्यगुणैकधामपरमान्दात्मिका राधिका लावण्याम्बुनिधिस्त्रिलोकरमणीचूडामणिः काचन॥

- श्री राधा सूक्ति

यह पृथ्वी धन्य है, उसमें श्री मथुरा, उसमें श्री धाम वृन्दावन, उनमें भी ब्रजवासी, उनमें भी युवती गोपियाँ और उनमें भी अचिन्त्य गुणों की ख़ान, परमानन्दमय, सौन्दर्य की निधि एवं तीनों लोकों की स्त्रियों में शिरोमणि श्री राधा ही धन्य है।