मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 2 (43)

मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 2 (43)

मेरी बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी,
मेरी ब्रजरस वारी भानुदुलारी॥ [1]
रस बरसाने वारी बरसाने वारी,
प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी। [2]
वारी वारी रँगीली महल वारी प्यारी,
जय हो जय हो नथ बेसरवारी प्यारी॥ [3]
प्रेमनिधि, छविनिधि, रसनिधि प्यारी,
नथवारी, भोरी भारी सुकुमारी प्यारी। [4]
वारी वारी वारी छवि कुंजबिहारी,
मेरे तो हैं ठाकुर, छैल बिहारी॥ [5]
कोऊ भजें ब्रह्म कोऊ भजें बनवारी,
मैं तो भजूँ प्यारी प्यारी बरसाने वारी। [6]
मेरी तो हैं ठकुरानी नथवारी प्यारी,
मेरे तो 'कृपालु' दोनों प्यारो अरु प्यारी॥ [7]

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 2 (43)

मेरी बरसानेवारी श्री राधारानी अत्यंत प्यारी हैं, जो वृषभानु दुलारी हैं, ब्रज रस प्रदान करने वाली हैं। [1]

मेरी राधारानी प्रेम-रस की वर्षा करने वाली हैं जो बरसाना धाम में वास करती हैं, जो वृषभानु दुलारी हैं एवं अति भोली हैं। [2]

हे रँगीली महल वाली प्यारी श्री राधा, आपकी बलिहारी है, हे नथ-बेसरवाली प्यारी, आपकी जय हो, जय हो। [3]

मेरी राधारानी प्रेम, छवि एवं रस की निधि हैं, नथ धारण करने वाली अति भोली एवं सुकुमारी प्यारी हैं। [4]

कुंजबिहारी श्री कृष्ण की सुन्दर छवि की बलिहारी है, मेरे ठाकुर तो छैल बिहारी श्री कृष्ण हैं। [5]

कोई ब्रह्म को भजता है एवं कोई श्री कृष्ण को भजता है, मैं तो प्यारी-प्यारी बरसाने वाली श्री राधा को ही भजता हूँ। [6]

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं “मेरी ठकुरानी तो नथ धारण करने वाली प्यारी श्री राधारानी हैं। दोनों प्यारो और प्यारी तो मेरे ही हैं।” [7]