जय जय श्री राधिका पद कमल।
सखी जन मन मोदकारी रसिक जीवन अमल॥ [1]
रमापति शुकदेव नारद नहीं पावत ध्यान।
नंद सुनु लहत कृपा बल सखी चरन प्रमान॥ [2]
नाहीं पावत लाल जाकी महिमा नित्य अपार।
श्रीराधिका पद वर कृपा बल करत नित्य बिहार॥ [3]
प्रिया पद नख चन्द्रिका की छटा कोटिक भाग।
स्याम सुन्दर लाल लै कर भयौ सुन्दर भजत नित अनुराग॥ [4]
सखी लालन को पोषै प्रिया पद रस प्याय।
लाल श्रवननि देत सखी नित राधिका गुन गाय॥ [5]
लाल हू सेबत कृपा बल कहा बरनों और।
श्री बंशि अलि को कुंवरि बिन नांहि कोऊ ठौर॥ [6]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (7)
श्री राधिका के चरण कमलों की जय हो जो सखियों के मन को सुख प्रदान करने वाले हैं एवं रसिक जनों के जीवन का आधार हैं । [1]
लक्ष्मीपति श्री हरि, शुकदेव, एवं नारद भी जिन चरण कमलों का ध्यान करने में असमर्थ हैं, उन चरण कमलों की सेवा नंदनंदन श्री कृष्ण को भी सखियों की कृपा से ही प्राप्त होता है। [2]
श्री राधा के चरण कमलों की महिमा नित्य एवं अनंत है, जिसका श्री कृष्ण भी पार पाने में असमर्थ हैं । श्री राधा के चरण कमलों की कृपा बल से ही श्री कृष्ण उनके संग नित्य विहार करते हैं। [3]
श्री प्रिया जी के चरण नखचन्द्र की छठा के करोड़वें अंश को लेकर ही श्यामसुन्दरलाल सुंदर बने हैं, ऐसे श्री चरणों को श्री कृष्ण बहुत ही अनुराग पूर्वक भजन करते हैं । [4]
सखियाँ श्री कृष्ण का पोषण श्रीराधिका के चरणों का रस पिलाकर करती हैं और श्री कृष्ण सखियों को श्रीराधा के गुणों का गान कर प्रसन्नता देते हैं । [5]
अब और कहाँ तक वर्णन किया जाय साक्षात श्री कृष्ण भी श्री राधा के चरण कमलों की कृपा के बल से ही उनकी सेवा करते हैं । श्री वंशी अली जी कहते हैं कि मेरा अनन्य आश्रय कुंवरि श्री राधा के चरणारविंद ही हैं । [6]
सखी जन मन मोदकारी रसिक जीवन अमल॥ [1]
रमापति शुकदेव नारद नहीं पावत ध्यान।
नंद सुनु लहत कृपा बल सखी चरन प्रमान॥ [2]
नाहीं पावत लाल जाकी महिमा नित्य अपार।
श्रीराधिका पद वर कृपा बल करत नित्य बिहार॥ [3]
प्रिया पद नख चन्द्रिका की छटा कोटिक भाग।
स्याम सुन्दर लाल लै कर भयौ सुन्दर भजत नित अनुराग॥ [4]
सखी लालन को पोषै प्रिया पद रस प्याय।
लाल श्रवननि देत सखी नित राधिका गुन गाय॥ [5]
लाल हू सेबत कृपा बल कहा बरनों और।
श्री बंशि अलि को कुंवरि बिन नांहि कोऊ ठौर॥ [6]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (7)
श्री राधिका के चरण कमलों की जय हो जो सखियों के मन को सुख प्रदान करने वाले हैं एवं रसिक जनों के जीवन का आधार हैं । [1]
लक्ष्मीपति श्री हरि, शुकदेव, एवं नारद भी जिन चरण कमलों का ध्यान करने में असमर्थ हैं, उन चरण कमलों की सेवा नंदनंदन श्री कृष्ण को भी सखियों की कृपा से ही प्राप्त होता है। [2]
श्री राधा के चरण कमलों की महिमा नित्य एवं अनंत है, जिसका श्री कृष्ण भी पार पाने में असमर्थ हैं । श्री राधा के चरण कमलों की कृपा बल से ही श्री कृष्ण उनके संग नित्य विहार करते हैं। [3]
श्री प्रिया जी के चरण नखचन्द्र की छठा के करोड़वें अंश को लेकर ही श्यामसुन्दरलाल सुंदर बने हैं, ऐसे श्री चरणों को श्री कृष्ण बहुत ही अनुराग पूर्वक भजन करते हैं । [4]
सखियाँ श्री कृष्ण का पोषण श्रीराधिका के चरणों का रस पिलाकर करती हैं और श्री कृष्ण सखियों को श्रीराधा के गुणों का गान कर प्रसन्नता देते हैं । [5]
अब और कहाँ तक वर्णन किया जाय साक्षात श्री कृष्ण भी श्री राधा के चरण कमलों की कृपा के बल से ही उनकी सेवा करते हैं । श्री वंशी अली जी कहते हैं कि मेरा अनन्य आश्रय कुंवरि श्री राधा के चरणारविंद ही हैं । [6]

