भक्त पै करी कृपा श्रीजमुना जू ऐसी। [1]
छाँड़ि निज-धाम बिस्राम भूतल कियो,
प्रगट लीला दिखाई हो तैसी॥ [2]
परम परमारथ करत हैं सबन को,
देति अद्भुत रूप आप जैसी। [3]
"नंददास " जो जन दृढ़ करि चरन गहै,
एकु रसना कहा कहै बिसैसी॥ [4]
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (14)
भक्तों पर श्री यमुना जी विशेष कृपा करती हैं । [1]
श्री यमुना जी अपने निज-धाम को छोड़ कर इस भूतल पर आयी हैं, एवं श्री श्यामाश्याम की प्रकट केलि-लीला का दर्शन कराया है। [2]
प्रत्येक शरणागत को परम-परमार्थ अर्थात अपने जैसी ही सखी वपुः प्रदान करती हैं। [3]
श्री नंददास जी कहते हैं कि जिसने भी दृढ़ता पूर्वक श्री यमुना जी के चरणों की शरण ली है, उसका परम मंगल हुआ है, जिसकी महिमा का गान मेरी एक रसना कहाँ तक करे ?" [4]
छाँड़ि निज-धाम बिस्राम भूतल कियो,
प्रगट लीला दिखाई हो तैसी॥ [2]
परम परमारथ करत हैं सबन को,
देति अद्भुत रूप आप जैसी। [3]
"नंददास " जो जन दृढ़ करि चरन गहै,
एकु रसना कहा कहै बिसैसी॥ [4]
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (14)
भक्तों पर श्री यमुना जी विशेष कृपा करती हैं । [1]
श्री यमुना जी अपने निज-धाम को छोड़ कर इस भूतल पर आयी हैं, एवं श्री श्यामाश्याम की प्रकट केलि-लीला का दर्शन कराया है। [2]
प्रत्येक शरणागत को परम-परमार्थ अर्थात अपने जैसी ही सखी वपुः प्रदान करती हैं। [3]
श्री नंददास जी कहते हैं कि जिसने भी दृढ़ता पूर्वक श्री यमुना जी के चरणों की शरण ली है, उसका परम मंगल हुआ है, जिसकी महिमा का गान मेरी एक रसना कहाँ तक करे ?" [4]

