सब तीरथ गुरु के चरन, नितही परवी होय।
सहजो चरणोदक लिये, पाप रहत नहिं कोय॥
- श्री सहजो बाई
सहजोबाई जी कहती हैं कि गुरुदेव के चरणों में सारे तीर्थ रहते हैं तथा उनकी सेवा करने से सदा पर्व का फल मिलता है। सद्गुरु के चरणोदक लेने से कोई भी पाप शेष नहीं रहता है।
सहजो चरणोदक लिये, पाप रहत नहिं कोय॥
- श्री सहजो बाई
सहजोबाई जी कहती हैं कि गुरुदेव के चरणों में सारे तीर्थ रहते हैं तथा उनकी सेवा करने से सदा पर्व का फल मिलता है। सद्गुरु के चरणोदक लेने से कोई भी पाप शेष नहीं रहता है।

