ललितकिशोरी यह विनै, जुगललाल सिरमौर।
विचरौं श्रीबन पावहूँ, व्रजवासिन के कौर॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (92)
हे ब्रज के सिरमौर श्री युगल किशोर, मैं आपसे यह विनती करता हूँ कि मैं सदैव श्री वृन्दावन में विचरण करूँगा एवं ब्रजवासियों से मधुकरी कर निर्वाह करूँगा।
विचरौं श्रीबन पावहूँ, व्रजवासिन के कौर॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (92)
हे ब्रज के सिरमौर श्री युगल किशोर, मैं आपसे यह विनती करता हूँ कि मैं सदैव श्री वृन्दावन में विचरण करूँगा एवं ब्रजवासियों से मधुकरी कर निर्वाह करूँगा।

