देखो करनी कमल की - श्री सूरदास, सूर सागर

देखो करनी कमल की - श्री सूरदास, सूर सागर

देखो करनी कमल की, कीनों जल सों हेत।
प्राण तज्यो प्रेम न तज्यो, सूख्यो सरहिं समेत॥

- श्री सूरदास, सूर सागर

कमल का निष्काम प्रेम तो देखो कि उसने जल से प्रेम किया था तो प्राण दे दिए, पर प्रेम को नहीं छोड़ा। यहाँ तक कि पानी के साथ कमल भी सूख गया।