हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो - श्री प्रिया सखी

हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो - श्री प्रिया सखी

हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो।
वृन्दावन मधि राधावल्लभ, मम नैननि कौ तारो॥ [1]
मंडल-सेवाकुंज पुलिन सब, ठौर-ठौर छवि भारो।
नव मंदिर जोरी की सोभा, 'प्रियासखी' उर धारो॥ [2]

- श्री प्रिया सखी

हे सखी, मुझे श्री वृन्दावन बहुत प्यारा लगता है, जहाँ मेरे आँखों के तारे श्री राधावल्लभलाल विराजमान हैं। [1]

रास-मंडल, सेवा कुञ्ज, यमुना पुलिन, आदि-आदि स्थानों में श्री श्यामाश्याम की अद्भुत छवि समाई हुई है। श्री प्रियासखी जी कहते हैं कि नव मंदिर में विराजमान युगल जोड़ी की शोभा को मैंने अपने ह्रदय में धारण कर लिया है। [2]