देखिके चरण चालि लाजत मराल गज - श्री संकेत अलि, संकेत लता

देखिके चरण चालि लाजत मराल गज - श्री संकेत अलि, संकेत लता

(कवित्त)
देखिके चरण चालि लाजत मराल गज,
नखन प्रकाश लखि भावत न चंदरी। [1]
एड़ी लाल मृदुल निहारि बारि जात बारि,
बारि में रहत सम लहत न मंदरी॥ [2]
नुपुरकी ध्वनि सुनि मोहत मनोज मन,
सोहत महावर अनूप छवि कंदरी। [3]
सौरभ लुनाई तट फैलत चलत संग,
आवत संकेत अलि प्यारी नंदनंद री॥ [4]
- श्री संकेत अलि, संकेत लता

श्री राधा-कृष्ण के चरणों की गति को देखकर राजहंस और गज भी लज्जित हो रहे हैं। उनके चरण नख के प्रकाश के समक्ष चंद्रमा भी फीका पड़ जाता है। [1]

उनके लाल-लाल एड़ियों (चरणों के तलवों) को देखकर सखियाँ बार-बार स्वयं को न्योछावर कर रही हैं। उनकी छवि अत्यंत सुंदर और मंद-गतिशील है। [2]

श्री श्यामा-श्याम के नूपुर की मधुर ध्वनि कामदेव के मन को मोह रही है। उनके चरणों में सुंदर महावर सुशोभित है, जिसकी अनुपम छवि कमल के समान है। [3]

श्री संकेत अलि कहते हैं कि यमुना के तट पर सुगंधित अंगों की सौरभ वायुमंडल में व्याप्त हो रही है, जब दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण कुंज में एक साथ विहार कर रहे हैं। [4]